थाल सजे दीप सजे
और सजे घर आँगन
गुनगुन करे ये मन
बरसे धन बरसे धन।
दीपों का त्योहार आया
ख़ुशियों की सौग़ात लाया
झूमे हर घर आँगन
बरसे धन बरसे धन।
बड़ों का आशीर्वाद मिले
बच्चों की मुस्कुराहटों को
लक्ष्मी पधारे घर आँगन
बरसे धन बरसे धन।
खील बताशे लिए
दीपों का त्योहार आया
ख़ुशियाँ जगमगाएँ सबके घर आँगन
बरसे धन बरसे धन।
क्लेश मिटे गंदगी मिटे
साफ़ हो मन पावन
जगमगाए हर घर आँगन
बरसे धन बरसे धन।
अवंतिका
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