Wednesday, October 11, 2017

भक्ति या आडंबर

हाल ही में नवरात्रि की धूम से सारे शहर और सारे गाँव गूँज रहे थे। माता शेरावाली के जयजयकार करते भक्तगण सब तरफ़ दिखायी दे रहे थे। पंडालों का भी ख़ूब रंग जमा हुआ था। जगह जगह पर साज सजावट के साथ माता अपने शेर पर विराजमान थीं। ऐसा ही एक पंडाल कोलकाता की श्री भूमि पर बना एक भव्य और बहुचर्चित पंडाल था। यक़ीनन आपने भी उसके बारे में सुना ही होगा।  यह पंडाल बहुचर्चित फ़िल्म बाहुबली के महिष्मति साम्राज्य की रूपरेखा से मेल खाता हुआ बनाया गया था। इस पंडाल को बनाने में 10 करोड़ रुपए ख़र्च किए गए।  माता रानी के आभूषण शिवगामी (महिष्मति साम्राज्य की महारानी) के आभूषणों से मेल खाते हुए बनवाए गए थे।  तीन महीने तक लगातार सौ से भी अधिक कारीगरों ने इस भव्य पंडाल का निर्माण कर अपनी कुशल कारीगरी का प्रमाण दिया। यह पंडाल इतना भव्य था की जिसने भी इसे देखा होगा वो इससे मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह पाया होगा। पर इन सबके बीच आपको नहीं लगता की देवी माँ की आराधना करने के लिए हमें भक्ति की आवश्यकता है आडंबरों की नहीं।   कभी सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत आज ग़रीब देशों में गिना जाता है। यक़ीनन भारत एक प्रगतिशील देश है जो दुनियाभर में अपनी पहचान बना चुका है। आज भी हमारे देश की पचास प्रतिशत आबादी ग़रीबी रेखा के नीचे है। लाखों बच्चे किताबों और बस्तों का ख़्वाब सजाये पेट पालने के लिए बाल मजदूरी की भट्टी में झोंक दिए जाते हैं। कितने ही ग़रीब लोग इलाज ना मिल पाने के कारण असमय ही काल के मुँह में चले जाते हैं। इन वास्तविकतायों से परे कुछ लोग बिना सोचे समझें धर्म के नाम आडंबरों में पैसा पानी की तरह बहा देते हैं।  क्या ऐसे भक्तगणों से मातारानी अधिक प्रसन्न होती होंगी?    सबको अपने तौर तरीक़े से ज़िंदगी जीने और अपने रुपए पैसे ख़र्च करने का पूरा अधिकार है पर सिर्फ़ 8-10 दिनों के लिए 10 करोड़ रुपए इस तरह के आडंबरों पर ख़र्च कर देना मेरे लिए किसी पागलपन से काम नहीं।
 

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