कुछ तेरा है कुछ मेरा है।
कुछ पुराने वायदे हैं, कुछ नये इरादें हैं।
कभी हँसी है, कभी ख़ुशी
तो कभी ग़म के बादल ठहरे।
कभी सागर की लहरों सा,
कभी मरुस्थल शाँत सा।
कभी सुबह की धूप सा
तो कभी पूनम के चाँद सा।
कभी है पतझड़ बेजान सा,
कभी सावन की फुहार सा।
कभी हँसी ठिठोली का,
कभी रूठने मनाने का।
कभी अजनबी सी आहट का,
कभी प्यार के अहसास का।
ये जो प्यार का रिश्ता है
कुछ तेरा है, कुछ मेरा।।