जो आके रुके दामन पे 'सबा'
वो अश्क़ नहीं है, पानी है।
जो अश्क़ न छलके आँखो से
उस अश्क़ की क़ीमत होती है।
वो पुरसिशे ग़म को आये हैं ,
कुछ कह न सकूँ चुप रह न सकूँ
खामोश रहूँ तो मुश्किल है
कह दूं तो शिकायत होती है ।
(पुरसिशे ग़म : ग़म का हाल चाल लेने )
Oh..kahi dekha hua hai ye :)
ReplyDelete